तलाश कर

हँसते है जो मंज़िलों पे तेरी
उन चेहरों को निराश कर
गर अड़चने है राहों में
नए रास्ते तलाश कर ।

मन्नतों से मिली है ज़िंदगी
मत इसको यूँ बर्बाद कर
बिखेर दे अपनी ख़ुशबू
एक जुनून की तलाश कर ।

है गर इश्क़ में तू लहूलुहान
ना ख़ुद को यूँ हताश कर
मरहम ढूँढना छोड़ दे 
नए ज़ख़्म की तलाश कर  

खुदा भी मिल जाएगा तुझे 
उसे दिल से जो तू याद कर 
मंदिर मस्जिद छोड़ के 
उसे ख़ुद में तू तलाश कर  

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