माँ

किसी के हिस्से मे मकाँ आया
किसी के हिस्से मे दुकाँ आयी
मै घर मे सबसे छोटा था
मेरे हिस्से मे माँ आयी ।

आज लाखों शब्द हैं ज़हन मे मेरे
पर उसी को पुकारा था मैंने
जब पहली दफे ज़बाँ आयी 

खुदा की इबादत कब काम आयी
झुलसता रहा मैं उलझनो की धूप मे
माँ आयी तो छाँव आयी  

मंज़िलें ढूँढने निकलते हैं जब 
मुसाफ़िरहो जाते हैं पराए
इतनी समझ उसे कहाँ आयी

अपना घरौंदा बसाया मैंने 
नाम भी काफ़ी कमाया मैंने 
काम बहुत उसकी दुआ आयी  

बाप बनकर भी, मैं बेटा ही रहा 
जब भी टटोली यादों की पोटली
याद बहुत माँ आयी


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