तेरे इश्क़ में

करते है लोग इश्क़ जाँच परख के
हम तो पहली नज़र में दिल लगा बैठे 

तूने तो ज़िक्र भी ना किया हमारा
हम हर महफ़िल में तेरी दास्ताँ सुना बैठे 

तुम वादें करके भुलाते गए 
हम तेरे एक वादें पे जान लुटा बैठे

ज़माने भर की ख़ुशियाँ तुमपे क़ुर्बान
तेरी हर मुस्कान पे कितने क़र्ज़े चढ़ा बैठे

तू अपना हुआ तो बाक़ी छूट गए 
एक तेरी ख़ातिर कितने दिल दुखा बैठे

कभी फ़ुर्सत में सोचते हैमुसाफ़िर 
तेरे इश्क़ में क्या क्या गवाँ बैठे

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