तेरे इश्क़ में
करते है लोग इश्क़ जाँच परख के
हम तो पहली नज़र में दिल लगा बैठे ।
तूने तो ज़िक्र भी ना किया हमारा
हम हर महफ़िल में तेरी दास्ताँ सुना बैठे ।
तुम वादें करके भुलाते गए
तूने तो ज़िक्र भी ना किया हमारा
हम हर महफ़िल में तेरी दास्ताँ सुना बैठे ।
तुम वादें करके भुलाते गए
हम तेरे एक वादें पे जान लुटा बैठे ।
ज़माने भर की ख़ुशियाँ तुमपे क़ुर्बान
तेरी हर मुस्कान पे कितने क़र्ज़े चढ़ा बैठे ।
तू अपना हुआ तो बाक़ी छूट गए
एक तेरी ख़ातिर कितने दिल दुखा बैठे ।
कभी फ़ुर्सत में सोचते है ‘मुसाफ़िर’
तेरे इश्क़ में क्या क्या गवाँ बैठे ।

Comments
Post a Comment