शहर की सड़कों पर


ज़िंदगी बीतें चार दीवारी में
बचपन बीते बीमारी में
मिलावट फल तरक़ारी में
धुआँ फाँके लाचारी में
रिश्ते बिके उधारी में
शहर की सड़कों पर 

बँट गयीं आरती और नमाज़े
फिर छिड़े दंगेफिर उठे जनाज़े
गले हैं रूँधेख़ामोश है आवाज़ें
शहर की सड़कों पर 

सुर्ख़ियो में एक और बलात्कार
किसीकी इज़्ज़त हुई तार तार 
इंसानियत फिर हुई शर्मसार 
शहर की सड़कों पर 

किसी का पत्थरकिसी का काँच
मुजरिम फ़रारनिर्दोष की जाँच 
दिखता है सियासत का नंगा नाच 
शहर की सड़कों पर 

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