चलो आज एक ख़्वाब जलाते है

चलो आज एक ख़्वाब जलाते है
वो जो देखा था कभी गुज़रे वक़्त में
छुपा रखा था जिसे एक ख़त में
उन ख़तों को अब पते पे पहुँचाते है
चलो आज एक ख़्वाब जलाते है 

सुलगता देख उसेआएगा सुकून थोड़ा
धुएँ में उसकेउड़ेगा मन का ग़ुबार थोड़ा
राख से उसकी, कुछ नए ख़्वाब बनाते है 
चलो आज एक ख़्वाब जलाते है  

वक़्त की उलझनों में उलझ के रह गए 
वैसे तो है बड़े मज़बूत मन्नतों के धागे 
यादों के गाठें खोल, इनको सुलझाते है 
चलो आज एक ख़्वाब जलाते है

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