याद आती नहीं. .. .
जाने क्यूँ तुम्हें याद मेरी आती नहीं,
हर पल मुझे यूँ बेवजह सताती नहीं,
यूँ तो दिल के सारे जज़्बात कह देती हो,
पर जो लगे मुझे बुरे, वो सुनाती नहीं,
वो भीगे हुए तकिये दास्तानें सुनाते हैं,
फ़िर जाने क्यूँ तुम मुझे, रुलाती नहीं,
फ़ुर्सत में मिलके हर हाल बयाँ करती हो,
मगर जानता हूँ कुछ बातें बताती नहीं,
मैं तो हर रोज तुम्हें ख्वाबों में देखता हूँ,
तुम साथ मेरे ख्वाब क्यों सजाती नहीं,
खुद तो रुसवा होना भी जानती नहीं,
पर मुझे रूठने के बाद भी मनाती नहीं,
तकब्बुर ये तुम्हारा, कभी मार ही डालेगा,
प्यार दिल में है, फ़िर क्यूँ जताती नहीं. .. .

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