ढूँढ़ रहा जग सारा हूँ. .. .


ये   घनघोर   घटाएँ    जैसे,   जुल्फ   कोई  लहराई  है,
बारिश  की   बूंदों  ने  शायद,  पायल  ही   झंकायी  है,
मचल  रही  है  धरती  भी,  खुशबु  कोई  महकायी  है,
अम्बर   से   है   बरस   रही,  अमृत   कोई   धारा   हो,
      ऐसी  ही  तस्वीर  लिए,  बस  ढूँढ़   रहा   जग  सारा  हूँ. .. .

दीवाने  सा  बहक   रहा,  बादल  भी  कुछ इठलाया है,
देख    रहा   ये   कलाबाजियां,  आसमान   इतराया  है,
झाँक रहा है छिप छिपकर, सूरज भी कुछ शरमाया है,
मांग  के  टीके  सा  माथे पर, चमक रहा कोई तारा हो,
     ऐसी  ही  तस्वीर  लिए,  बस  ढूँढ़   रहा  जग   सारा  हूँ. .. .

माथे  सा   है  आसमान,  आँखों   सा   सागर  पाया   है,
दूर  क्षितिज  भौहों  के  जैसा,  मिलन  कराने  आया है,
मस्त  हुई  हैं,  झूम  रही,  लहरों  ने   गीत   सुनाया   है,
सुन्दरतम इस दृश्य पे दिल ये, हर एक बार मैं हारा  हूँ,
     ऐसी  ही  तस्वीर  लिए,  बस  ढूँढ़   रहा   जग  सारा  हूँ. .. .

आँखो   सी  गहराई  है,  सागर   में   कोई  बात  भी   है,
मन के जैसी उथल पुथल और, मोती जैसे ख्वाब भी  है,
गर्म  सुनहरे  दिन  हैं  तो,  शीतल सी चांदनी रात भी है,
तिनका  हूँ,  और  डूब  रहा, अब  किसका  सहारा  हो,
     ऐसी  ही  तस्वीर  लिए,  बस  ढूँढ़  रहा   जग   सारा  हूँ. .. .

गालो  से  ये खेत  सुनहरे,  इनमे  ही  क्यों न  खो जाऊं,
दिल अब तक था तेरा  क्यों,  मैं  भी  न  तेरा  हो  जाऊं,
नाक सी सुन्दर पगडंडी,  थक कर  उसपे ही सो जाऊं,
आज  तलक  'निरंकुश'  जैसे,  भटक  रहा   बेचारा  हो,
     ऐसी   ही  तस्वीर  लिए,  बस   ढूँढ़  रहा   जग  सारा हूँ. .. .

होठों  से  ये  मय  के  प्याले,  देख  नशा  ही  हो   जाये,
पीने का बस ख्याल ही हो और, जान फ़ना ही हो जाये,
चेहरे  सी  भूल - भुलैया   में,  दीवाना  अब   खो   जाये,
झूम  रहा,  मदमस्त   हुआ,  जैसे   कोई   आवारा   हो,
      ऐसी  ही  तस्वीर  लिए,   बस   ढूँढ़  रहा  जग  सारा  हूँ. .. .

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