याद -An Imagery



जब लम्बी उन राहों में,
कुछ ठंडी सर्द हवाओं सी,
वो पलकों से टकराती है,
कुछ हलचल सी हो जाती है,
जब बारिश की बूंदें बनकर,
वो मुझसे मिलने आती है,
और गालों को छू जाती है,
इक सिहरन सी हो जाती है,
तब याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है. .

जब ठंड भरी उन सुबहों में,
कुछ ओस की नन्ही बूंदों सी,
वो हाथों में आ जाती है,
बाहें भी खुद खुल जाती है,
और याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है. .

जब अंधियारी उन रातों में,
हम सोच में डूबे होते है,
कुछ समझ नहीं आता है जब,
कुछ परेशान से होते हैं,
तब पल भर की इक याद सी वो,
खुद ही मिलने आ जाती है,
इक धुंधली सी तस्वीर है वो,
कुछ साफ़ नज़र नहीं आती है,
पर याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है. .

कोई परी ही होगी वो शायद,
जादू की छड़ी घुमाती है,
और झट से इस चेहरे पर इक,
मुस्कान निखर के आती है,
फिर याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है. .

उस धुंधली सी तस्वीर को हम,
दिल के बक्से में रखते हैं,
कोई साथ भले हो या न हो,
हम साथ 'निरंकुश' रहते हैं,
उस मुलाक़ात की वो प्यारी,
गर रात कभी जो आती है,
तब मैं उसको बतलाऊंगा,
कि याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है,
हाँ याद बहुत वो आती है. .. .

Comments