गर तुम न मिल सको. .. .


शायद ये मोहब्बत  गुमनाम ही रह जाये,
शायद तुम्हें कभी मेरी,  याद ही ना आये,
शायद मेरी आरज़ू मुझे मिल भी  न पाये,
या शायद ये ख्याल ही सारे झूठे हो जाये,
उन तीन शायदो की मुझे फ़िक्र भी  नहीं, 
      कि आखिरी ही शायद मुकम्मल हो जाये.  .. .⁠⁠⁠⁠


गर तुम न मिल सको, तो ऐसी ज़िन्दगी पे लानत है.  .. .

बरसो    गुज़र   गये    तुम्हे    पाने   की   चाह   में,
बहुत दूर आ गया  हूँ  अब तो  ज़िन्दगी की  राह में,
हर     रोज     तुम्हारी     तस्वीर       देखता      हूँ,
मेरे   खुदा  हो  तुम,  तो  ये   ही  मेरी   इबादत   है,
गर तुम न मिल सको, तो ऐसी ज़िन्दगी पे लानत है.  .. .

दिल जो टूटा, ख्याल आया कोई नज़्म ही लिख दूँ,
ज़ुबान  से  न  कह  सका  जो,   स्याही  से  कह दूँ,
निज़ी  ख़यालात  सारे,   शायरी  से  आम  कर  दूँ,
सामने    देखा,    तो     हर    शख्स   नदारद    है,
और तुम भी न मिल सको, तो ऐसी ज़िन्दगी पे लानत है.  .. .

सोचता था, ज़िन्दगी में मैने, बहुत कुछ पा लिया,
क़ामयाबी   को  अपने  कदमों  में  झुका  लिया,
गिनती की,  चन्द उंगलियों में सिमट के रह गयी,
शायद़  मुझे  ही  इन   नाकामियों  की  आदत है,
उसपे तुम भी न मिल सको, तो ऐसी ज़िन्दगी पे लानत है.  .. .

बैठ  जाउंगा,   कोस  लेना  तुम   मुझे   जी   भर   के,
गर    तुम्हें    मेरी    मोहब्बत    पे     शक़     भी     है,
हाँ,  मैं   ज़रा   आवारा   हूँ,  ख्याल   कम   रखता  हूँ, 
और  उसके   लिये,  तुम्हें  रुसवाइयो  का  हक़ भी  है,
रुसवा  होती  हो  तो  हो,  तुम्हें  इसकी भी इज़ाज़त है,
मगर  मेरी न  बन  सको, तो ऐसी ज़िन्दगी पे लानत है.  .. .

Comments