मतलबी से हैं. .. .
कभी एक पल गुजरना था नहीं आसान जिनके बिन,
आज अपने ही जाने क्यूँ वो सारे अजनबी से हैं,
मिसाल - ए - इश्क़ मिलती थी कभी यूँ ही ज़माने में,
आज देखो जिधर आशिक़ ही सारे मतलबी से हैं.
सुबह देखा था सूरज अरुणिमा के साथ आया था,
शाम ढलते नज़र आया कि दोनों अजनबी से हैं,
लगा था साथ देती हैं ये परछाईयाँ हरदम,
रात होते समझ आया कि ये भी मतलबी से हैं.
कि जिन राहों को अपना मानकर, हाँ चल पड़ा था मैं,
पलटकर देखता हूँ, रास्ते ही अजनबी से हैं,
ज़माने की हक़ीक़त जानकर उम्मीद करता हूँ,
'निरंकुश' ख्याल ही मेरे ये सारे मतलबी से हैं.

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